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मंदिर में नारियल क्यों फोड़ा जाता है?

मंदिर में नारियल क्यों फोड़ा जाता है?

हिन्दू धर्म में अनेक तरह के धार्मिक रीति रिवाज़ हैं। हिन्दू धर्म तो बस एक नाम है, असल में तो यह “सनातन धर्म” है। इस धर्म के अनेक पहलु हैं और इनको जितना जाना जाए उतना ही कम है।

आपने भी अपने जीवन में कभी न कभी किसी हिन्दू धर्म अनुष्ठान में नारियल को ज़मीन पर फोड़ते हुए ज़रूर देखा होगा। आपके मन में शायद यह बात आई होगी कि मंदिर में नारियल क्यों फोड़ा जाता है? तो इस लेख में हम यही जानेंगे कि आखिर मंदिर में नारियल क्यों फोड़ा जाता है और इसका हिन्दू धर्म में क्या महत्त्व है?

वैसे तो मंदिर में नारियल फोड़ने को लेकर अनेक प्रकार कि आस्थाएं हैं लेकिन इस लेख में हम उन मुख्य आस्थाओं का वर्णन करेंगे जिसके कारण यह कर्म इष्ट देव की पूजा के समय किया जाता है। तो आइए जानते हैं।

मंदिर में नारियल फोड़ने का आध्यात्मिक महत्त्व

कुछ आस्थाओं की मानें तो इस क्रिया का एक अध्यात्मिक महत्त्व है। एक नारियल के फल की मनुष्य के साथ तुलना की गयी है। नारियल की जटाओं की तुलना हमारे अंदर पल पल उठती और कभी न ख़त्म होने वाली इच्छाओं से की गयी है। हम नारियल की जटाओं को सबसे पहले उतारते हैं। इस से यह अर्थ हुआ कि मनुष्य को भी अपने अंदर उठते इन कभी न ख़त्म होने वाले विचारों का त्याग करना चाहिए।

उसके बाद नारियल का जटिल (सख्त) खोल आता है। यह हमारे अहंकार को दर्शाता है। प्रभु मिलन से पहले इस अहंकार को नष्ट करना अत्यंत ज़रूरी है।

जैसे ही नारियल को फोड़ते हैं तो इस से पानी का प्रवाह होता है। यह हमारे अंदर नकारात्मकता का प्रतीक है। जैसे ही अहंकार का नाश होता है, हमारे मन और शरीर के अंदर की नकारात्मकता ख़त्म हो जाती है।

अंत में सफ़ेद नारियल की गिरी रह जाती है, जिसकी तुलना शाश्वत और पवित्र “आत्मा” से की गयी है। आत्मा ही है जो सबसे पवित्र रूप में ईश्वर है।

नारियल की मनुष्य के विभिन्न शरीरों से तुलना

कुछ आस्थाओं की मानें तो नारियल को एक व्यक्ति के समान माना गया है। हिन्दू धर्म के अनुसार एक व्यक्ति के तीन शरीर होते हैं। यह तीन तरह के शरीर इस प्रकार हैं:

  • स्थूल शरीर
  • सूक्ष्म शरीर
  • कारण शरीर

स्थूल शरीर

स्थूल शरीर वह है जो प्रत्यक्ष रूप से दिखता है यानी कि वह शरीर जिसमें हम अभी विद्यमान हैं या जिस शरीर में हम अपने को अभी जानते हैं। स्थूल शरीर की नारियल के बहार की जटाओं से तुलना की गयी है।

सूक्ष्म शरीर

सूक्ष्म शरीर मन द्वारा निर्मित शरीर है। इस शरीर को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकते इसलिए इसे सूक्ष्म शरीर कहा गया है। यह शरीर मन और भावनाओं द्वारा निर्मित होता है। अंग्रेज़ी में इस शरीर को “Astral Body” भी कहा जाता है। नारियल की सफ़ेद गिरी की तुलना सूक्ष्म शरीर से की गयी है।

कारण शरीर

कारण शरीर हमारे अचेतन मन के संस्कारों से उत्पन्न हुए बीज द्वारा निर्मित होता है। यही संस्कार हमारे पुनर्जन्म का कारण बनते हैं। कारण शरीर की नारियल के पानी से तुलना की गयी है।

और नारियल के ऊपर के तीन छिद्र मनुष्य की तीन आँखों को दर्शाते हैं। दो भौतिक आँखें जो प्रत्यक्ष हैं और एक अध्यात्मिक आँख है जिसे ज्ञान चक्षु या त्रिनेत्र भी कहा जाता है।

मंदिर में नारियल क्यों फोड़ा जाता है?

मंदिर में नारियल दो मुख्य कारणों से फोड़ा जाता है। यह कारण हैं:

  • मंदिर में नारियल फोड़ने से अभिप्राय आत्म बलिदान से है। यानि कि इस संसार की भलाई और दूसरों के अच्छे के लिए खुद का त्याद करना। हमें ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि हमारा यह जन्म संसार के सभी प्राणियों की सेवा के लिए न्योछावर होना चाहिए।
  • दूसरे अर्थ में मंदिर में नारियल फोड़ने से अभिप्राय अपने अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार का नाश करके प्रभु चरणों में अपने जीवन का अर्पण करने से भी है।

मंदिर में जब जब पूजा होती है तब तब हर बार नारियल क्यों फोड़ा जाता है?

मंदिर में पूजा के समय हर बार नारियल इसलिए फोड़ा जाता है ताकि हमें उपरोक्त्त कही गयी शिक्षाएं हमेशा याद रहें और कभी भूलें न। मनुष्य का मन जितनी बार किसी बात का अनुसरण करता है उतना ही वह मनुष्य उस कार्य में परिपक्व हो जाता है।

निष्कर्ष

तो यह था मंदिर में पूजा के समय फोड़े जाने वाले नारियल का महत्त्व। आशा करता हूँ आप इस लेख से जान गए होंगे कि मंदिर में नारियल क्यों फोड़ा जाता है? कृप्या कर के इस लेख को दूसरों के साथ भी सांझा कीजियेगा।

स्वस्थ रहिये, खुश रहिये…

जय श्री कृष्ण!

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